: RBI ने बैंकों से IT इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश बढ़ाने का आग्रह किया
Sat, Jun 8, 2024
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों को अपने बिजनेस ग्रोथ और वॉल्यूम के अनुसार IT इंफ्रास्ट्रक्चर में पर्याप्त निवेश करने को कहा है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की मीटिंग के बाद शुक्रवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने यह महत्वपूर्ण बात कही।
तकनीकी रुकावटें: बैंकों की जिम्मेदारी
RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने बताया कि तकनीकी रुकावटों का मुख्य कारण बैंकों की खुद की समस्याएं हैं, ना कि NPCI और UPI की। उन्होंने कहा, "जब भी कोई तकनीकी रुकावट आती है, तो समस्या NPCI और UPI में नहीं होती, बल्कि बैंकों की समस्याएं होती हैं। इसके कई कारण हैं, जिनसे हम निपट रहे हैं।"
कोटक महिंद्रा बैंक पर लगी थी रोक
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कोटक महिंद्रा बैंक पर लगी थी रोक[/caption]हाल ही में RBI ने कोटक महिंद्रा बैंक के टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म पर सुपरवाइजरी कंसर्न का हवाला देते हुए ऑनलाइन और मोबाइल बैंकिंग चैनलों के माध्यम से नए ग्राहकों को जोड़ने और नए क्रेडिट कार्ड जारी करने पर रोक लगा दी थी। यह प्रतिबंध किसी भी संभावित लंबे समय तक रुकावट को रोकने के लिए लगाए गए थे, ताकि बैंक की कस्टमर सर्विस पर और डिजिटल बैंकिंग व पेमेंट सिस्टम्स के फाइनेंशियल इकोसिस्टम पर कोई गंभीर प्रभाव न पड़े।
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ICICI बैंक ने बढ़ाया IT और साइबर सिक्योरिटी पर खर्च
ICICI बैंक ने हाल ही में घोषणा की है कि उसने इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी और साइबर सिक्योरिटी पर अपने खर्च को काफी हद तक बढ़ा दिया है। बैंक ने इसे 2019 में टोटल ऑपरेटिंग एक्सपेंस के 5.6% से बढ़ाकर वित्तीय वर्ष 2023-24 में 9.4% कर दिया है। ICICI बैंक को पिछले कुछ समय में आउटेज की कई घटनाओं का सामना करना पड़ा था।
IT रेसिलिएंस और कस्मर सिक्योरिटी पर फोकस
ICICI बैंक के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर संदीप बत्रा ने चौथी तिमाही के रिजल्ट घोषित करने के बाद कहा, "IT रेसिलिएंस और कस्मर सिक्योरिटी हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण है और यह किसी बजट की बाध्यता नहीं है।" उन्होंने यह भी बताया कि बैंक के पास क्विक रिकवरी और करेक्टिव एक्शंस लेने की क्षमता है और वे अपनी क्षमताओं को बेहतर बनाने पर निरंतर फोकस कर रहे हैं।
निवेश और सुधार के लिए प्रतिबद्धता
संदीप बत्रा ने कहा, "यह एक सतत प्रयास है और किसी भी बैंक में रुकावट और खामियां हो सकती हैं। हमारे पास क्विक रिकवरी और करेक्टिव एक्शंस लेने की क्षमता है और हम अपनी क्षमताओं को बेहतर बनाने पर फोकस करेंगे।" उन्होंने जोर देकर कहा कि बैंक जब भी निवेश की आवश्यकता होगी, वह इसे प्राथमिकता देगा।
ब्याज दरों में स्थिरता: ग्राहकों को राहत
भारतीय रिजर्व बैंक ने लगातार आठवीं बार ब्याज दरों में बदलाव नहीं किया है, जिससे ग्राहकों को राहत मिली है। RBI ने ब्याज दरों को 6.5% पर जस का तस रखा है। इसका मतलब है कि लोन महंगे नहीं होंगे और आपकी EMI भी नहीं बढ़ेगी।
RBI
ने आखिरी बार फरवरी 2023 में दरें 0.25% बढ़ाकर 6.5% की थीं।
कोटक बैंक और ICICI बैंक की पहल
कोटक महिंद्रा बैंक ने अपने IT इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए 400 इंजीनियर हायर करने की योजना बनाई है। यह कदम बैंक के IT प्लेटफॉर्म को और अधिक मजबूत बनाने में मदद करेगा, जिससे RBI द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों का प्रभाव कम होगा।ICICI बैंक ने भी अपने iMobile ऐप में तकनीकी खामियों को सुधारने के लिए सक्रिय कदम उठाए हैं। बैंक ने बताया कि 17,000 नए क्रेडिट कार्ड की डिटेल्स लीक हुई थीं, लेकिन एरर की वजह से किसी भी मिसयूज की घटना नहीं हुई।भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकों को आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर में पर्याप्त निवेश करने का निर्देश दिया है ताकि तकनीकी रुकावटों को कम किया जा सके। कोटक महिंद्रा बैंक और ICICI बैंक ने भी अपने-अपने स्तर पर सुधार के कदम उठाए हैं, जिससे कस्टमर सिक्योरिटी और IT रेसिलिएंस को मजबूत किया जा सके। ब्याज दरों में स्थिरता से ग्राहकों को राहत मिली है और यह सभी कदम मिलकर भारतीय बैंकिंग सिस्टम को और भी सशक्त बनाएंगे।
: रिकॉर्ड 76,795 पर पहुंचा, सेंसेक्स 2% से ज्यादा उछला
Fri, Jun 7, 2024
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रिकॉर्ड 76,795 पर पहुंचा, सेंसेक्स 2% से ज्यादा उछला[/caption]
सेंसेक्स ने अपनी यात्रा में नई ऊंचाइयों को छूने का जश्न मनाया, जब यह आज 2% से अधिक बढ़ गया और रिकॉर्ड 76,795 पर पहुंच गया। इस प्रेरणादायक उछाल के पीछे है रिजर्व बैंक के अद्यतन GDP अनुमान, जिसने बाजार को एक और बूस्ट दिया। आखिरी कारोबारी दिन में निफ्टी भी नए ऊंचाइयों पर बंद हुआ, जब यह 23,290 पर पहुंचा, जिसमें इतिहास रच दिया गया।
सेंसेक्स और निफ्टी में यह ऊंचाइयाँ बाजार में उत्साह को बढ़ा रही हैं। सेंसेक्स के सभी 30 शेयरों में तेजी दिखाई दी, जहाँ M&M, विप्रो, टेक महिंद्रा, टाटा स्टील, इंफोसिस और भारती एयरटेल ने शीर्ष पर्फ़ॉर्मेंस दी। बाजार में रिजर्व बैंक के GDP अनुमान को लेकर उम्मीद जताई जा रही है, जिसने विश्वसनीयता को और बढ़ाया है।
भारतीय शेयर बाजार में सकारात्मक रुझान:
दूसरी ओर, तेलुगु देशम पार्टी से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में भी धमाकेदार बढ़ोतरी देखने को मिली। हेरिटेज फूड्स और अमारा राजा के शेयर तीन दिनों में 40% से ज्यादा बढ़ चुके हैं, जो बाजार में निवेशकों के आत्मविश्वास को और qqEA3Qभी मजबूत कर रहे हैं।रिजर्व बैंक की घोषणा के साथ, नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस के सभी सदस्यों ने नरेंद्र मोदी को गठबंधन के नेता के रूप में स्वीकार किया है, जिससे बाजार में एक सकारात्मक माहौल है।अमेरिकी बाजार में भी एक तबादला आया, जहाँ फ्लैट कारोबार देखने को मिला। यहाँ भी निवेशकों के मनोबल को बढ़ाने के लिए सकारात्मक संकेत दिए गए।सभी इन परिप्रेक्ष्यों में, भारतीय बाजार की ओर दृष्टि रखते हुए, निवेशकों को एक सकारात्मक और अनुकूल माहौल में उत्साहित किया जा रहा है।
NSE - National Stock Exchange
: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) की आज
Wed, Jun 5, 2024
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) की आज
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) की आज से मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की मीटिंग शुरू हो रही है। इस महत्वपूर्ण मीटिंग में आरबीआई के बैठने से नए दिशानिर्देश तय होंगे, जो आर्थिक उदारीकरण और विकास के प्रति निरंतर समर्थन को बढ़ावा देगे।
इस मीटिंग में बदलाव के संकेत नहीं हैं, जैसा कि अनुसंधानकर्ताओं ने बताया है। वर्तमान में रेपो दर 6.50% है, जो बिना किसी परिवर्तन के अप्रैल की मीटिंग से आई थी।
पिछले वित्त वर्ष में रेपो दर में कई बदलाव हुए थे, जिससे आर्थिक स्थिति में सुधार किया गया था। आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी की मीटिंग नियमित अंतराल पर होती है और इसका पहला चरण अप्रैल 2022 में हुआ था, जब रेपो दर को 4% पर निर्धारित किया गया था। लेकिन तब 2 और 3 मई को अनायास होने वाली मीटिंग में इसे 0.40% बढ़ाकर 4.40% कर दिया गया था।
रेपो दर में परिवर्तन की यह सीरीज उस समय शुरू हुई थी, जब 22 मई 2020 को बिना किसी अद्यतन के यह बदलाव किया गया था। इसके बाद, 6 से 8 जून के बीच हुई मीटिंग में इसे 0.50% बढ़ाया गया, जिससे यह 4.40% से बढ़कर 4.90% हो गई। इसके बाद अगस्त में 0.50% का और बढ़ोतरी किया गया और यह 5.40% पर पहुंच गई।सितंबर में ब्याज दरें 5.90% हो गईं और फिर दिसंबर में 6.25% पर पहुंच गईं। इसके बाद, 2022-23 के वित्त वर्ष की आखिरी मीटिंग फरवरी में हुई, जिसमें रेपो दरें 6.25% से बढ़ाकर 6.50% कर दी गई थीं।
भारतीय शेयर बाजार में सकारात्मक रुझान:
रेपो दर के परिवर्तन का क्या महत्व है?
रिजर्व बैंक के पास रेपो दर के माध्यम से महंगाई को नियंत्रित करने का एक शक्तिशाली और प्रभावी तरीका है। जब महंगाई बढ़ती है, तो आरबीआई रेपो दर में वृद्धि करके मनी सप्लाई को नियंत्रित करने का प्रयास करता है, जिससे रुपये की मूल्य में स्थिरता बनी रहे। यदि रेपो दर उच्च होती है, तो बैंकों को ऋण लेने की दर बढ़ाने पर प्रेरित किया जाता है, जिससे उन्हें
आरबीआई
से ऋण प्राप्त करने पर अधिक ब्याज देना पड़ता है। यह उन्हें ऋण देने में आतंकित करता है और इस प्रक्रिया को स्थायीता प्रदान करता है।
सम्प्रेषिति के तौर पर, रेपो दर में कमी के लिए आरबीआई का निर्णय अर्थव्यवस्था को उत्तेजित करने का उपाय है। जब आर्थिक संकट की स्थिति होती है, तो आरबीआई रेपो दर को कम करके ऋण लेने के लिए अधिक सुलभता प्रदान करती है, जिससे उद्यमियों को आर्थिक गतिविधियों को पुनः प्रारंभ करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है।
इस प्रकार, आरबीआई के निर्णय उत्तरदायित्वपूर्ण और सकारात्मक दिशा में अर्थव्यवस्था को प्रेरित करने का काम करते हैं, जो देश के अर्थतंत्र के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत होते हैं।