बालोद: राइस मिलर्स का कस्टम मिलिंग नीति के खिलाफ धरना प्रदर्शन, 150 करोड़ के भुगतान की मांग
बालोद
: जिला विपणन अधिकारी कार्यालय के सामने बालोद जिले के
राइस मिल संचालकों
ने नई
कस्टम मिलिंग नीति
के खिलाफ एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया। मिलर्स ने
काली पट्टी
बांधकर अपनी नाराजगी जाहिर की और कहा कि वे मौजूदा नीति के तहत कस्टम मिलिंग का काम जारी रखने में असमर्थ हैं। धरने के बाद, मिलर्स ने जिला विपणन अधिकारी और जिला खाद्य अधिकारी से मुलाकात की, जहां उन्होंने अपनी समस्याएं और मांगें रखीं।
मुख्य मांगें और समस्याएं
लंबित भुगतान
:
राइस मिल एसोसिएशन के प्रदेश सलाहकार
मोहन भाई पटेल
ने बताया कि बीते
दो-तीन वर्षों से लगभग 150 करोड़ रुपये
का भुगतान बकाया है। इस मुद्दे पर प्रशासन और सरकार से बार-बार चर्चा की गई, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला।
नई नीति के खिलाफ विरोध
:
नई कस्टम मिलिंग नीति में जो शर्तें जोड़ी गई हैं, वे राइस मिलर्स के हित में नहीं हैं।
अतिरिक्त पेनाल्टी
के कारण मिलर्स को वित्तीय संकट का सामना करना पड़ रहा है।
आकाश कटारिया
, सचिव, राइस मिल एसोसिएशन, ने कहा,
"सरकार की नीति हमें बली का बकरा बना रही है। जबरदस्ती अनुबंध और कस्टम मिलिंग करने का दबाव बनाया जा रहा है, जिसे हम अस्वीकार करते हैं।"
वित्तीय संकट और कर्ज का दबाव
:
राइस मिल संचालक
सुबोध टावर
ने कहा कि सरकार की नीतियां राइस मिलर्स के पक्ष में नहीं हैं।
"हम पहले से ही कर्ज में डूबे हुए हैं। ऐसे में मिल संचालन और परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल हो रहा है।"
प्रशासन का पक्ष
जिला खाद्य अधिकारी
तुलसी राम ठाकुर
ने कहा:
“यह शासन स्तर का मामला है। राज्य सरकार से निर्देश मिलते ही लंबित भुगतान का समाधान किया जाएगा। लेकिन कस्टम मिलिंग का कार्य नियमों के अनुसार होगा, और सभी मिलर्स को पंजीयन कराना होगा।”
मिलर्स का आरोप और प्रशासन की प्रतिक्रिया
मिलर्स का कहना है कि प्रशासन जबरन कस्टम मिलिंग का दबाव बना रहा है, जबकि वे लिखित में समस्या का समाधान चाहते हैं। दूसरी ओर, प्रशासन का कहना है कि कस्टम मिलिंग का काम रोकना उचित नहीं है और यह राज्य सरकार के स्तर पर तय होगा