: ओडिशा की युवती के साथ दरिंदगी, दिल्ली पुलिस की सूझबूझ से तीन आरोपी हिरासत में
Admin Fri, Nov 8, 2024
दिल्ली में 10 अक्टूबर की रात ओडिशा की एक युवती के साथ हुई सामूहिक दुष्कर्म की दर्दनाक घटना ने लोगों को निर्भया कांड की याद दिला दी है। इस मामले में नई जानकारी सामने आ रही है, जिसमें पुलिस की कड़ी मेहनत और बुद्धिमत्ता ने मुख्य भूमिका निभाई है। घटना के बारे में जानकारी 11 अक्टूबर की सुबह दी गई, जिसके बाद पीड़िता को AIIMS में भर्ती कराया गया। मानसिक स्थिति ठीक न होने के कारण पीड़िता घटना के बारे में अधिक जानकारी देने में असमर्थ थी और जांच में सहयोग नहीं कर पा रही थी।
पीड़िता का विश्वास जीतकर मिली सफलतापुलिस ने एक अनोखी योजना बनाई ताकि आरोपियों तक पहुंचा जा सके।इसके तहत AIIMS प्रबंधन की विशेष अनुमति लेकर एक महिला पुलिस अधिकारी, संगीता, को नर्स बनाकर पीड़िता की देखभाल में लगाया गया।पीड़िता के विश्वास में आते ही उसने कुछ महत्वपूर्ण जानकारी साझा की, जिसमें बताया गया कि एक आरोपी दिव्यांग है।इसी दिशा में पुलिस ने 21 दिनों की कड़ी मेहनत के बाद तीनों आरोपियों तक पहुंच बनाई।पीड़िता का इलाज अभी भी AIIMS में जारी हैऔर उसकी मानसिक स्थिति में सुधार के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं। 700 से अधिक CCTV फुटेज खंगाले गएDCP (दक्षिण-पूर्वी दिल्ली) रवि कुमार सिंह ने बताया कि 11 अक्टूबर को सुबह 3:15 बजे PCR को एक कॉल मिली थी।मौके पर पहुंची पुलिस ने युवती को गंभीर हालत में पाया और उसे तुरंत AIIMS ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया।युवती ने डॉक्टर को तीन अज्ञात लोगों द्वारा दुष्कर्म किए जाने की जानकारी दी थी।पीड़िता की मानसिक स्थिति के कारण आगे की पूछताछ में उसे अयोग्य पाया गया।पुलिस ने सूरज कॉलोनी थाने में मामला दर्ज कर जांच शुरू की।पुलिस ने Sarai Kale Khan से Old Delhi Railway Station तक की लगभग सभी मुख्य सड़कों पर लगे 700 से अधिक सरकारी और निजी CCTV कैमरों की फुटेज को जांचा।10 अक्टूबर की सुबह 10:14 पर पीड़िता Old Delhi Railway Station के वेटिंग हॉल से बाहर निकलती हुई देखी गई।इसके बाद पुलिस ने अलग-अलग जगहों के CCTV फुटेज का बारीकी से विश्लेषण किया।आरोपी ऑटो चालक की पहचानफुटेज में दिखाई दे रहे संदिग्ध ऑटो-रिक्शा को पहचानने के लिए 150 से अधिक ऑटो-रिक्शाओं की जांच की गई।लगातार प्रयासों के बाद, पुलिस को आखिरकार आरोपी ऑटो चालक का सुराग मिला,जिसका नाम प्रभु महतो था। 30 अक्टूबर को उसे गिरफ्तार कर लिया गया।पूछताछ में उसने अन्य दो आरोपियों, प्रमोद बाबू (नरेला) और मोहम्मद शमशुल (गांधी नगर), के नाम बताए।प्रमोद बाबू और मोहम्मद शमशुल को 2 और 4 नवंबर को गिरफ्तार किया गया। घटनाक्रम की जानकारी और सबूतों का खुलासापुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी प्रमोद बाबू एक शराबी है, और हर दिन की तरह उस रात भी वह शराब पी रहा था। इस दौरान उसने मानसिक स्थिति ठीक न होने के कारण लाचार पीड़िता को देखा और दुष्कर्म की योजना बनाई। इसी बीच, दिव्यांग मोहम्मद शमशुल वहां पहुंचा और दोनों ने मिलकर युवती को एक निर्जन स्थान पर खींच लिया और दुष्कर्म किया। इस घटना को देखने वाले ऑटो चालक प्रभु महतो ने भी इसमें भाग लिया और पीड़िता को ऑटो में ले जाकर उसके साथ दुर्व्यवहार किया। बाद में उसे Sarai Kale Khan में छोड़ दिया। घटना में इस्तेमाल किए गए ऑटो, खून से सने कपड़े, आरोपियों के कपड़े, CCTV फुटेज जैसे सबूतों को बरामद किया गया है।
ओडिशा में दर्ज हुआ गुमशुदगी का मामलापीड़िता का परिवार निम्न-मध्यम वर्गीय परिवार से है।वह लंबे समय से सामाजिक कार्यों में सक्रिय थीऔर नौकरी के अवसर के झांसे में आकर दिल्ली आई थी।दिल्ली में उसे बुलाने वाले ने उसे धोखा दिया,और वह अपने परिवार को बताए बिना दिल्ली आ गई।इस दौरान वह रेलवे स्टेशन और अन्य जगहों पर रहने लगी।ओडिशा में उसके परिवार ने उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट भी दर्ज कराई थी। घटना के बाद की स्थिति और उपचारघटना के बाद से पीड़िता का AIIMS में इलाज जारी है, जहां उसे सर्जरी के दौर से गुजरना पड़ा। उसकी मानसिक स्थिति में सुधार के लिए भी हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। पुलिस ने इस मामले में कठोर परिश्रम और सूझबूझ का परिचय देते हुए आरोपियों को पकड़ने में सफलता प्राप्त की है।
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