: नीरज चोपड़ा ने पेरिस ओलंपिक में जीता ऐतिहासिक रजत, अर्शद नदीम के रिकॉर्ड-ब्रेकिंग थ्रो से चूके गोल्ड

Admin Fri, Aug 9, 2024

नीरज चोपड़ा ने पेरिस ओलंपिक 2024 में क्वालिफायर के दौरान अपने पहले ही प्रयास में 89.43 मीटर का जोरदार थ्रो कर ,

अपनी श्रेष्ठता साबित की और फाइनल के लिए जगह बना ली। यह उनका सीजन का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था और उनके करियर का दूसरा सबसे बड़ा थ्रो।नीरज ने पुरुषों की जेवलिन फाइनल में अपने खिताब को बरकरार रखने का लक्ष्य रखा था,लेकिन पाकिस्तान के अर्शद नदीम के ओलंपिक रिकॉर्ड तोड़ने वाले थ्रो के कारण उन्हें दूसरा स्थान मिला।हालांकि यह एक ऐतिहासिक रजत पदक था, लेकिन 26 वर्षीय नीरज ने स्वीकार किया कि ,

वह तब तक संतुष्ट नहीं होंगे जब तक वे पेरिस में अपने प्रदर्शन से बेहतर उपलब्धि हासिल नहीं कर लेते।

पुरुषों के जेवलिन फाइनल में पहले राउंड में सभी प्रतिस्पर्धियों ने शांत शुरुआत की,लेकिन दूसरे प्रयास में नदीम ने 92.97 मीटर का थ्रो कर ओलंपिक रिकॉर्ड तोड़ दिया,जो पहले नॉर्वे के एंड्रियास थॉर्किल्डसन के नाम था। नीरज ने दूसरे राउंड में 89.45 मीटर का नया सीजन बेस्ट थ्रो किया,जो उन्हें दूसरे स्थान पर ले गया। लेकिन वह नदीम का रिकॉर्ड तोड़ने में असफल रहे,

जिन्होंने अपने अंतिम प्रयास में 91.79 मीटर का एक और विशाल थ्रो किया।

नीरज अपने सर्वश्रेष्ठ फॉर्म में नहीं दिखे और केवल एक वैध थ्रो कर सके, जिससे उन्होंने अपना खिताब नदीम को सौंप दिया।यह नीरज की 2016 के बाद नदीम के खिलाफ पहली हार थी। फाइनल के बाद नीरज ने अपने दोस्त नदीम को बधाई दी ,और स्वीकार किया कि नदीम ने उस रात बेहतर प्रदर्शन किया।हालांकि यह वह गोल्ड नहीं था जिसकी उम्मीद की जा रही थी,

नीरज ने पेरिस ओलंपिक में भारत के लिए पहला रजत पदक जीतकर इतिहास रच दिया।

उन्होंने नॉर्मन प्रिचर्ड, सुशील कुमार, पीवी सिंधु और मनु भाकर के बाद ओलंपिक में दो पदक जीतने वाले पांचवें एथलीट बने।नीरज ने यह भी बताया कि फाइनल में उनके पांच में से छह फाउल थ्रो का कारण उनकी एडडक्टर चोट थी।उन्होंने यह भी कहा कि वह और मजबूत होकर वापसी करेंगे।"जब भी मैं थ्रो करता हूं, 60-70 प्रतिशत फोकस चोट पर होता है। मेरी रनवे आज अच्छी नहीं थी,मेरी स्पीड भी कम थी। जो भी किया, मैंने इसी समस्या के साथ किया। मुझे सर्जरी का समय नहीं मिला।मैं खुद को बस आगे बढ़ा रहा था," उन्होंने कहा। "मेरे अंदर अभी बहुत कुछ बचा हुआ है।
मुझे वह करना है। जब तक मैं उसे हासिल नहीं कर लेता, मैं संतुष्ट नहीं रहूंगा।"
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